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Friday, 18 July 2014

स्वस्थ जीवन शैली: कला और विज्ञान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी दिनांक 19-20 जुलाई, 2014 (शनिवार-रविवार)

आधुनिक सभ्यता ने भौतिक धरातल पर विचार और आचरण का जो ताना-बाना बुना है, जिसमें नैसर्गिता का लोप होता दिखाई पड़ता है। मानव निर्मित यह स्थिति क्रमिक रूप से मानव को प्राकृतिक विचारधारा और प्राकृतिक जीवन शैली से दूर ले जा रही है। प्रदूषित पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण दोहन, मानव की सोच, रहन-सहन, खान-पान आदि में आये परिवर्तनों के कारण मानव सामाजिक दुष्प्रभावों के साथ-साथ कई मनोदैहिक विकारों से त्रस्त हो रहा है।
मानव के स्वस्थ एवं सुखी जीवन के लिए मानव और प्रकृति के मध्य सह-अस्तित्व का जो संबंध है, उसे जानने तथा तद् अनुसार विवेकपूर्ण जीवनशैली विकसित करने की आवश्यकता पर प्रबुद्ध चिंतक, दक्ष चिकित्सक बल दे रहे हैं। इस आवश्यकता को अनुभव करते हुए, आरोगय भारती एवं मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिष् (मेपकास्ट) द्वारा “स्वस्थ जीवन शैली: कला और विज्ञान“ विषय पर दिनांक 19-20 जुलाई, 2014 (शनिवार-रविवार) को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है। यह संगोष्ठी मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (मेपकास्ट) स्थित सभागृह में 19 जुलाई को प्रातः 10 बजे उद्घाटन सत्र के साथ प्रारंभ होगी।
स्वस्थ रहने के लिए हर आयु वर्ग के अलग-अलग मानदंड होते हैं। गर्भावस्था से वृद्धावस्था तक स्वस्थ रहने के लिए होने वाले प्रयोग एवं उनसे संबंधित शोध पत्र इस दौरान प्रस्तुत किये जायेंगे। इस संगोष्ठी में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त गुजरात आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय जामनगर, भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान जयपुर एवं स्वामी विवेकानंद योग अनुसंसाधन संस्थान बेंगलूरु के वैज्ञानिकोें द्वारा शोधपत्रों का वाचन किया जायेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में अद्भत प्रयोग करने वाले व्यक्तियों के अनुभव कथन भी शामिल होंगे।
डाॅ. अशोक वार्ष्णेय , आ.भा. संगठन मंत्री, आरोग्य भारती

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