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Monday, 21 July 2014

स्वर्गीय श्री सहाय ने सेवा धर्म का इतिहास बनाया - मुख्यमंत्री श्री चौहान

प्रथम शीतला सहाय स्मृति पुरस्कार से वरिष्ठ पत्रकार श्री मदनमोहन जोशी सम्मानित

भोपाल :  मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि स्वर्गीय शीतला सहाय ने सेवा-धर्म का इतिहास बनाया। श्री चौहान आज रविन्द्र भवन में शीतला सहाय पुण्य स्मृति समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम में केन्सर उपचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिये चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा स्थापित प्रथम शीतला सहाय स्मृति पुरस्कार वरिष्ठ पत्रकार श्री मदनमोहन जोशी को प्रदान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मुख्यमंत्री श्री सुंदरलाल पटवा ने की। कार्यक्रम में केन्द्रीय श्रम एवं खनन मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर और पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री सहाय उनके कार्यों के लिये समाज में सदैव जीवित रहेंगे। उनका जीवन देश और समाज के लिये था। अल्पायु पुत्र के मृत्युरूपी जीवन के सबसे बड़े दुख से वह टूटे नहीं और वज्र के समान संकल्प के साथ खड़े हो गये। श्री चौहान ने कहा कि श्री सहाय के कामों को आगे बढ़ाने के लिये सरकार और समाज को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि केंसर का एक बड़ा कारण तंबाकू है। केंसर को जड़ से उखाड़ फेकने के लिये तंबाकू के सेवन के खिलाफ जनजागृति अभियान चलाया जाना चाहिये।
केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि भावी पीढ़ी को सत्कर्म की प्रेरणा देने के लिये श्री शीतला सहाय के व्यक्तित्व का स्मरण किया जाना चाहिये। वे कर्मयोगी थे। कार्यकर्ताओं की प्रेरणा थे। समर्पण और संकल्प बल के धनी थे। उन्होंने ट्रक चलाकर कण्डे ढ़ोकर और लॉटरी बेचकर ग्वालियर में केंसर अस्पताल की स्थापना के लिये कार्य किया। यही कारण था कि आपातकाल के दौरान उनके जेल में रहते हुये भी केंसर अस्पताल के निर्माण का कार्य रुका नहीं। उनका सार्वजनिक जीवन स्वच्छ, निर्मल और पारदर्शी था।
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्री रामलाल ने कहा कि संवेदनशीलता और सेवाभाव ही व्यक्ति को बड़ा बनाता है। स्वर्गीय श्री शीतला सहाय ने राजनैतिक जीवन को नया आयाम दिया। उन्होंने बताया कि राजनीति केवल निर्वाचन तक सीमित नहीं है। राजनीतिज्ञ द्वारा भी विशाल सामाजिक संस्थायें खड़ी की जा सकती हैं। शीतला सहाय स्मृति ग्रंथ के संपादक श्री महेश श्रीवास्तव ने कहा कि स्वर्गीय श्री सहाय का कर्मक्षेत्र भले ही ग्वालियर रहा लेकिन उनकी कीर्ति पूरे प्रदेश और देश में व्याप्त है। कृतज्ञता ज्ञापन डॉ. श्रीमती अलका प्रधान ने किया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा स्वर्गीय शीतला सहाय स्मृति ग्रंथ का विमोचन और उनके जीवन पर निर्मित बेवसाइट का लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह, राजस्व एवं पुनर्वास मंत्री श्री रामपाल सिंह, सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री श्री लालसिंह आर्य, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री श्री शरद जैन, सांसद श्री अनूप मिश्रा और श्री भागीरथ प्रसाद, महापौर भोपाल श्रीमती कृष्णा गौर, ग्वालियर महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता पूर्व सांसद श्री विक्रम वर्मा, श्री कैलाश सारंग, श्री मेघराज जैन सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
अजय वर्मा

Friday, 18 July 2014

स्वस्थ जीवन शैली: कला और विज्ञान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी दिनांक 19-20 जुलाई, 2014 (शनिवार-रविवार)

आधुनिक सभ्यता ने भौतिक धरातल पर विचार और आचरण का जो ताना-बाना बुना है, जिसमें नैसर्गिता का लोप होता दिखाई पड़ता है। मानव निर्मित यह स्थिति क्रमिक रूप से मानव को प्राकृतिक विचारधारा और प्राकृतिक जीवन शैली से दूर ले जा रही है। प्रदूषित पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण दोहन, मानव की सोच, रहन-सहन, खान-पान आदि में आये परिवर्तनों के कारण मानव सामाजिक दुष्प्रभावों के साथ-साथ कई मनोदैहिक विकारों से त्रस्त हो रहा है।
मानव के स्वस्थ एवं सुखी जीवन के लिए मानव और प्रकृति के मध्य सह-अस्तित्व का जो संबंध है, उसे जानने तथा तद् अनुसार विवेकपूर्ण जीवनशैली विकसित करने की आवश्यकता पर प्रबुद्ध चिंतक, दक्ष चिकित्सक बल दे रहे हैं। इस आवश्यकता को अनुभव करते हुए, आरोगय भारती एवं मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिष् (मेपकास्ट) द्वारा “स्वस्थ जीवन शैली: कला और विज्ञान“ विषय पर दिनांक 19-20 जुलाई, 2014 (शनिवार-रविवार) को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है। यह संगोष्ठी मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (मेपकास्ट) स्थित सभागृह में 19 जुलाई को प्रातः 10 बजे उद्घाटन सत्र के साथ प्रारंभ होगी।
स्वस्थ रहने के लिए हर आयु वर्ग के अलग-अलग मानदंड होते हैं। गर्भावस्था से वृद्धावस्था तक स्वस्थ रहने के लिए होने वाले प्रयोग एवं उनसे संबंधित शोध पत्र इस दौरान प्रस्तुत किये जायेंगे। इस संगोष्ठी में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त गुजरात आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय जामनगर, भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान जयपुर एवं स्वामी विवेकानंद योग अनुसंसाधन संस्थान बेंगलूरु के वैज्ञानिकोें द्वारा शोधपत्रों का वाचन किया जायेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में अद्भत प्रयोग करने वाले व्यक्तियों के अनुभव कथन भी शामिल होंगे।
डाॅ. अशोक वार्ष्णेय , आ.भा. संगठन मंत्री, आरोग्य भारती

Thursday, 17 July 2014

भोपाल को दुनिया का सबसे सुन्दर शहर बनायेंगे

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भोपाल को दुनिया का सबसे सुन्दर शहर बनाया जायेगा। भोपाल में लाईट मेट्रो ट्रेन शुरू की जायेगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ करीब 29 करोड़ 47 लाख रूपये की लागत से बनने वाले केबल स्टे ब्रिज के शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में गृह मंत्री श्री बाबूलाल गौर, महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नगर निगम को विकास कार्यों के लिये मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना में 120 करोड़ रूपये उपलब्ध करवाये गये हैं। भोपाल में राजधानी होने के गौरव को बढ़ाने वाले विकास कार्य किये गये हैं। भोपाल में सुनियोजित विकास हुआ है। यातायात की दिक्कतों को दूर किया गया है। भोपाल के विकास के लिये राज्य सरकार हरसंभव मदद करेगी। इस केबल स्टे ब्रिज के बनने से भोपाल की गौरव बड़ी झील की सुन्दरता और बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज मध्यप्रदेश विकास के हर मापदण्ड पर आगे बढ़ रहा है। विकास दर और कृषि विकास में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विकास का लाभ हर गरीब तक पहुँचाया गया है क्योंकि हम मानते हैं कि संसाधनों पर सबका हक है। ऐसी आवास नीति बनाई जा रही है जिसमें सबके लिये आवास की व्यवस्था हो। उन्होंने अपील की कि हर बच्चे को स्कूल भेजें और शिक्षित मध्यप्रदेश बनाने में हर नागरिक सहयोग करे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भोपाल नगर निगम बेहतर काम कर रही है। नगर निगम को राज्य शासन का पूरा सहयोग मिलेगा। ग्रामीण विकास मंत्री एवं जिले के प्रभारी श्री गोपाल भार्गव ने कहा कि मध्यप्रदेश शहरी और ग्रामीण विकास दोनों क्षेत्रों में अग्रणी है। इस केबल ब्रिज के बनने से यातायात सुगम होगा।
महापौर श्रीमती कृष्णा गौर ने स्वागत भाषण में कहा कि कमला पार्क से रेत घाट तक बनने वाला यह केबल स्टे ब्रिज शहर के लिये एक बड़ी सौगात है। प्रदेश का पहला 6 लेन फ्लाय ओवर हबीबगंज में बन रहा है। विधायकगण सर्वश्री आरिफ अकील, सुरेन्द्र नाथ सिंह, विश्वास सारंग, रामेश्वर शर्मा और विष्णु खत्री, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष श्री मोहम्मद सगीर, महापौर परिषद के सदस्य, पार्षद और प्रशासनिक अधिकारी इस मौके पर उपस्थित थे। अंत में आभार प्रदर्शन नगर निगम अध्यक्ष श्री कैलाश मिश्रा ने किया।
केबल स्टे ब्रिज
भोपाल शहर में कमला पार्क से रेत घाट तक केबल स्टे ब्रिज का निर्माण कार्य जेएनएनयूआरएम में 29.47 करोड़ रुपये लागत से करवाया जायेगा। ब्रिज 300 मीटर लम्बाई में एवं 17 मीटर चौड़ाई में बनाया जायेगा। अत्याधुनिक तकनीक से बनाये जाने वाला यह स्टील केबल स्टे ब्रिज पुराने और नये भोपाल शहर के बीच सेतु का काम करेगा।               एस.जे.

Tuesday, 15 July 2014

धुएं में फिक्र

कभी बचपन में हम बच्चों को दुबले-पतले, खांस-खांस कर बीड़ी फूंकते हुए बुजुर्गो के मुंह से बीड़ी खींच कर और फिर उन्हें यह कह कर चिढ़ाते हुए खूब मजा आता था कि ‘बीडी पीकर ज्ञान घटे, खांसत-खांसत जी थके, खून सूखा अंदर का, मुंह देखो बन्दर का’ । हमारी इन हरकतों से नाराज होकर जब कोई बुजुर्ग हमारे पीछे अपनी बीड़ी के लिए हांफ-हांफ कर दौड़ लगा बैठते तो हम एक ही सांस में दूर तक भाग खड़े होते। तब हताश होकर वे बेचारे थोड़ी दूर भागने के बाद ही थक हारकर वहीं बैठ बंडल से दूसरी बीड़ी जलाकर धुंआ उगलने बैठ जाते। यह देख हम चोरी-छिपे दबे पांव आकर उनके पीछे चुपचाप इस ताक में बैठ जाते कि कब हमें फिर से यह खेल खेलने का मौका मिले। इस दौरान जब कभी उनकी नजर हम पर पड़ती तो वे डांटने डपटने के बजाय मुस्कराते हुए उल्टी-सीधी बीड़ी मुंह में फंसा कर कभी नाक से तो कभी मुंह से हवा में धुंए की विभिन्न कलाकृतियाँ उकेरने लगते तो हम मंत्रमुग्ध होकर यह खेल देखते दंग रह जाते। तब उनका यह करतब हमारे लिए किसी जादूगर के जादू से कम न था।

बचपन के दिन बीते और बड़े हुए। समझ में आया कि बचपन में हम तो मासूम थे ही, लेकिन बीड़ी का धुंआ उड़ाने वाले हमारे बड़े बुजुर्ग भी कम मासूम न थे, जो खांसते-खांसते बेदम होकर भी हमें धुंए की जादूगरी दिखाना कभी न भूले, पर कभी यह न जान सके कि यह धुंआ सबके लिए कितना घातक है। आज भी गांव से लेकर शहर तक जब किसी को बेफ्रिक होकर धुंआ उड़ाते, मुंह में गुटखा ठूसें देखती हूँ तो यही लगता कि हम पहले से भी ज्यादा मासूम हो चुके हैं, जो लाख चेतावनी और जागरूकता के बावजूद भी तम्बाकू को गले लगाकर खुश हुए जा रहे हैं।
           हाल ही में तम्बाकू से बचने के तमाम उपदेशों के प्रचार के साथ विश्व तम्बाकू निषेध दिवस गुजर गया। माना जाता है कि धूम्रपान सर्वप्रथम अमेरिका में 'रेड इंडियंस' ने शुरू किया। सन् 1600 के प्रारम्भ में यह यूरोप के देशों में फैला।   मौजूदा समय में विश्व जनसंख्या का एक बड़ा भाग धूम्रपान  के रूप में तम्बाकू का उपयोग करता है, बहुत सारे लोग इसे चबाते हैं।  जबकि  लगभग सभी वैज्ञानिक शोध तम्बाकू के नतीजों में तम्बाकू के सेवन को हानिकारक बताया गया है। निकोटीन सिगरेट में प्रयोग होने वाली तम्बाकू का एक व्यापक उत्तेेजना पैदा करने वाला घातक होता है। यह अधिक विषैला होता है और शरीर पर कई तरह के घातक असर डालता है।  धूम्रपान से बढ़ा हुआ रक्त हृदय रोग की संभावनाओं को बढ़ा देता है। गर्भवती महिलाओं में निकोटिन से भ्रूण की वृद्धि कम होती है। निकोटीन के अलावा तम्बाकू के धुंए में कार्बनमोनोआॅक्साइड बहुचक्रीय ऐरोमेटिक हाइड्रोकार्बन एवं टार पाये जाते हैं।  यह टार कैंसर पैदा करने में किस तरह की भूमिका निभाता है, यह अब छिपा नहीं है। यह ध्यान रखना चाहिए कि  फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित पंचानबे फीसद मरीज धूम्रपान या तम्बाकू चबाने के कारण इस स्थिति में पहुंचते हैं। इसके अलावा, भारत में सबसे ज्यादा टीबी या तपेदिक के रोगी मिलते हैं, जिसकी एक सबसे बड़ी वजह धूम्रपान ही है। साथ ही, खांसी या  ब्रोंकाइटिस,  हृदय संवहनी रोग, फेफड़ों की बीमारी का नतीजा यह होता है की इससे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो जाता है।
दरअसल, तम्बाकू सेवन रोगों को खुला निमंत्रण तो देता ही है, साथ ही यह धूम्रपान न करने वालों को चिड़चिड़ा बनाता है। बल्कि सच कहा जाय तो धूम्रपान न करने वाले इसकी आदत रखने वालों से परेशान ही रहते हैं, भले ही वे सार्थक विरोध नहीं जता पाएं।

विजयराघवगढ़ में अंत्योदय मेला

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कटनी जिले के विजयराघवगढ़ में अंत्योदय मेला को संबोधित किया।

अच्छी वर्षा के लिए भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उज्जैन में सपरिवार भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना कर प्रदेश में अच्छी वर्षा की प्रार्थना की।

Saturday, 12 July 2014

प्रजातंत्र की गरिमा कायम रखी है श्री शिवराज ने

प्रजातंत्र में लोकप्रियता की कसौटी का मापदण्ड क्या? इसका सबसे सरल और सीधा जवाब है जनता की स्वीकार्यता और चुनाव में जीत। श्री शिवराजसिंह चौहान की इससे बड़ी जन स्वीकार्यता क्या होगी कि प्रदेश के युवा उन्हें अपने मामा, महिलायें अपने भाई और प्रदेशवासी अपना सबसे प्रिय हितैषी मानते हैं। ऐसा कोई एक-दो दिन में नहीं हुआ। श्री शिवराज ने मन वचन और आचरण से अपने आप को ऐसा ढ़ाला है कि पूरा प्रदेश उनका अपना हो गया। और जहाँ तक चुनाव में जीत का सवाल है वे लगातार इस कसौटी में खरे उतरे हैं।

मध्यप्रदेश के जैत गाँव के किसान परिवार में 5 मार्च 1959 को जन्मे श्री शिवराजसिंह चौहान बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के धनी हैं। नेतृत्व क्षमता उनमें बचपन से है। छोटी कक्षा में मानीटर बनने से लेकर मॉडल हायर सेकेण्ड्री स्कूल के छात्र संघ अध्यक्ष तक उन्होंने छात्र जीवन में नेतृत्व का पाठ सीखा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विभिन्न पदों में रहे। भारतीय जनता पाटी के युवा मोर्चा के अनेक पदों से लेकर अध्यक्ष तक का पदभार उन्होंने संभाला। वे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। वे सन् 1990 में पहली बार बुदनी विधानसभा क्षेत्र में विधायक का चुनाव जीते। उनकी नेतृत्व क्षमता, मिलनसारिता, सरल व्यक्तित्व और सर्वसुलभता का परिणाम था कि वे पाँच बार चुनाव में विजयी होकर विदिशा-रायसेन लोकसभा क्षेत्र से संसद सदस्य रहे। नेतृत्व क्षमता को ही पहचान कर भारतीय जनता पार्टी ने शिवराजसिंह चौहान में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की योग्यता देखी। शिवराजसिंह चौहान 29 नवम्बर 2005 को पहली बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने। पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री बनाये जाने के निर्णय में वे एक सफलतम व्यक्ति साबित हुए।

वर्ष 2008 में प्रदेश विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री रहते हुए चौहान ने नेतृत्व में लड़ा गया। इसमें भारतीय जनता पार्टी ने पुन: ऐतिहासिक जीत दर्ज की। परिणामस्वरूप श्री चौहान ने 12 दिसम्बर 2008 को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की दोबारा शपथ ली। इस विजय ने साबित कर दिया कि शिवराजसिंह चौहान सही अर्थों में जननेता हैं। उन पर आम जन का अटूट विश्वास है। शिवराज ने भी इस विश्वास को कभी खंडित नहीं होने दिया। उन्होंने प्रदेश में प्राय: सभी वर्गों की पंचायतें बुलाकर उनके हित में व्यवहारिक निर्णय लिये।

उन्होंने मध्यप्रदेश को बीमारू के कलंक से उबार कर देश का सबसे तेजी से विकसित होता राज्य बनाया। उनके कार्यकाल में मध्यप्रदेश की विकास दर लगातार डबल डिजिट में चल रही है। कृषि विकास दर 19 प्रतिशत से अधिक होने का चमत्कार मध्यप्रदेश में श्री चौहान के नेतृत्व में देखा है। प्रदेश में 24 घंटे बिजली और क्षिप्रा का नर्मदा से मिलन भी किसी चमत्कार से कम नहीं है। सिंचाई, सड़कें, उद्योग आदि हर क्षेत्र में मध्यप्रदेश के बढ़ते कदम देश के लिये उदाहरण बन गये। श्री शिवराज का संकल्प है कि मध्यप्रदेश को देश का ही नहीं दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है। जनता भी उनके साथ है तभी पिछले विधानसभा निर्वाचन में श्री चौहान के जादुई नेतृत्व में उन्हे 165 सीटों का प्रचंड बहुमत मिला। उन्होंने 14 दिसम्बर 2013 को जम्बूरी मैदान में आयोजित ऐतिहासिक समारोह में तीसरी बार लगातार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की शपथ ली।

आकर्षण है श्री शिवराज में। वे प्रदेश के ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो बिल्कुल सरल, सहज, मिलनसार हैं। उनमें पद का घमंड किसी ने कभी ने देखा होगा। हर कोई उनसे मिल लेता है। बल्कि यह कहना ज्यादा ठीक होगा कि वे खुद ही जाकर हर किसी से मिल लेते हैं। इसमें सबसे बड़ी बात यह की वे पंक्ति में खड़े सबसे आखिरी व्यक्ति तक पहुँचने की कोशिश ही नहीं करते स-प्रयास उनके समीप होते हैं। लगता है हर किसी की पीड़ा उनकी अपनी है। इस पीड़ा को हर लेना चाहते हैं वे।

कठिन परिश्रम में उनका कोई सानी नहीं है। आश्चर्य होता है देखकर कि वे प्रतिदिन 18 घंटे से अधिक लगातार कार्य करते हैं। उनके द्वारा किया गया जनदर्शन, वनवासी सम्मान यात्रा और अभी हाल में हुये विधानसभा चुनावों से पहले उनकी जन आशीर्वाद यात्रा सुबह से लेकर अक्सर दूसरा दिन लग जाने तक लगातार चलीं। वे कभी थकते नहीं दिखे। विभागों की समीक्षा का दौर और प्रशासनिक कार्य भी वे ऐसे ही लगातार करते हैं। उन्होंने एक आम कार्यकर्ता से लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बनने का सफल इसी परिश्रम से तय किया है। वे सतत अध्ययनशील हैं। सामान्यत: किसी भी विषय पर वे बिना अध्ययन के नहीं बोलते। जब भी बोलते हैं पूरे अधिकार के साथ विषय पारंगत होकर। सबने सुना है धर्मों और दर्शन के विविध आयामों पर उन्हें बोलते हुए। गीता के श्लोक उन्हें कंठस्थ हैं। सामयिक विषयों पर लगातार तथ्य परक बात करते हैं। उनके मुख से कबीर और संत रविदास, महात्मा ज्योतिबा फुले की वाणी झरने के शुद्ध जल की तरह प्रवाहित होते देखी है। प्रकाश पर्व पर गुरू ग्रंथ साहब, पर्यूषण पर्व के क्षमापर्व के अवसर पर जैन धर्म का उल्लेख, इस्लाम और ईसाई धर्मों के त्यौहारों पर शिवराज का धार्मिक संवाद सुन बहुतों को अवाक होते देखा है। अपने शासकीय निवास पर इन सब धर्मों को बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री हैं।

श्री चौहान ने अपने जीवन में पं. दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन को अपनाया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने जितनी भी योजनाएँ बनाईं सभी में पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रेरणा दिखायी देती है। वे दीन को भगवान मानकर उनकी सेवा का संकल्प लिये कार्य करते हैं। पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति और समाज के सबसे कमजोर वर्ग का सबसे पहले कल्याण उनका लक्ष्य होता है।

दृढ़-इच्छाशक्ति के साथ संकल्पबद्ध होकर कार्य करना उनकी विशेषता है। इसी विशेषता से उन्होंने मध्यप्रदेश में बेटी को बोझ से वरदान बना दिया। आज मध्यप्रदेश में बेटियाँ अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। शिवराज का '' बेटी बचाओ अभियान'' प्रदेश में जन आंदोलन का रूप ले चुका है। बेटियों की घटती संख्या राष्ट्रीय चिंता का विषय है। मध्यप्रदेश में उनके द्वारा प्रारंभ अभियान से वे देश में बेटी बचाओ आंदोलन के प्रणेता बन गये हैं।
श्री शिवराज अपने सरल स्वभाव और साफगोई से सबको अपना बना लेते हैं। राजनीति में उनकी सौजन्यता से विरोधी भी कायल हो जाते हैं। राजनीति उनके लिये सेवा का माध्यम है। उन्होंने अपने पुरूषार्थ, कर्मठता और सहजता से राजनीति को नयी शैली दी है। प्रजातंत्र की गरिमा ऐसे ही नेतृत्व से कायम है।
        श्री गौतम  http://mpinfo.org से साभार