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Sunday, 17 August 2014

जन्माष्टमी

मान्यता है कि त्रेता युग में  'मधु' नामक दैत्य ने यमुना के दक्षिण किनारे पर एक शहर ‘मधुपुरी‘ बसाया। यह मधुपुरी द्वापर युग में शूरसेन देश की राजधानी थी। जहाँ अन्धक, वृष्णि, यादव तथा भोज आदि सात वंशों ने राज्य किया। द्वापर युग में भोजवंशी उग्रसेन नामक राजा राज्य करता था, जिसका पुत्र कंस था।  कंस बड़ा क्रूर, दुष्ट, दुराचारी और प्रजापीड़क था। वह अपने पिता उग्रसेन को गद्दी से उतारकर स्वयं राजा बन बैठा। उसकी एक बहन थी, जिसका नाम देवकी था। वह अपनी बहन से बहुत प्यार करता था। जब उसका विवाह यादववंशी वसुदेव से हुआ तो वह बड़ी खुशी से उसे विदा करने निकला तो रास्ते में आकाशवाणी हुई  कि- "हे कंस! जिस बहन को तू इतने लाड़-प्यार से विदा कर रहा है, उसके गर्भ से उत्पन्न आठवें पुत्र द्वारा तेरा अंत होगा।" यह सुनकर उसने क्रोधित होकर देवकी को मारने के लिए तलवार निकाली, लेकिन वसुदेव के समझाने और देवकी की याचना पर उसने इस शर्त पर उन्हें हथकड़ी लगवाकर कारागार में डलवा दिया कि उनकी जो भी संतान होगी वह उसे सुपुर्द कर देंगे। एक के बाद एक सात संतानों को उसने जन्म लेते ही मौत के घाट उतार दिया। 
          आकाशवाणी के अनुसार जब आठवीं संतान होने का निकट समय आया तो उसने पहरा और कड़ा कर दिया। लेकिन ईश्वर की लीला कौन रोक पाता? वह समय भी आया जब भादों मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में घनघोर अंधकार और मूसलाधार वर्षा में भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में ‘परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुस्कृताम' तथा 'धर्म संस्थापनार्थाय' अर्थात् दुराचरियों का विनाश कर साधुओं के परित्राण और धर्म की स्थापना हेतु भगवान श्रीकृष्ण अवतरित हुए। 
       
कंस इस बात से अनभिज्ञ था कि ईश्वर जन्म नहीं वह तो अवतरित होते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने अवतरण के साथ ही अपनी लीलायें आरम्भ कर दी। अवतरित हुए तो जेल के पहरेदार गहरी नींद में सो गये। वसुदेव-देवकी की हथकडि़यां अपने आप खुल गई। आकाशवाणी हुई तो वसुदेव के माध्यम से सूपे में आराम से लेट गये और उन्हें उफनती यमुना नदी पार करवाकर नंदबाबा व यशोदा के धाम गोकुल पहुंचा दिया। जहाँ नंदनंदन और यशोदा के लाड़ले कन्हैया बनकर उनका जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। आज भी यह सम्पूर्ण भारत के साथ ही विभिन्न देशों में भी मनाया जाता है। मथुरा तथा वृन्दावन में यह सबसे बड़े त्यौहार के रूप में बड़े उत्साह के साथ 10-12 दिन तक बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिर में श्रीकृष्ण की अपूर्व झांकियां सजाई जाती हैं। यहाँ श्रद्धालु जन्माष्टमी के दिन मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर में रखे सवा लाख के हीरे जडि़त झूले में भगवान श्रीकृष्ण को झूलता देख, खुशी से झूमते हुए धन्य हो उठते हैं।
           बहुमुखी व्यक्तित्व के स्वामी श्रीकृष्ण आत्म विजेता, भक्त वत्सल तो थे ही साथ ही महान राजनीतिज्ञ भी थे, जो कि महाभारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। श्रीकृष्ण ने अत्याचारी कंस को मारकर उग्रसेन को राजगद्दी पर बिठाया। महाभारत के युद्धस्थल में मोहग्रस्त अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए अपना विराट स्वरुप दिखाकर उनका मोह से मुक्त कर जन-जन को ‘कर्मण्येवाधिकारिस्ते मा फलेषु कदाचन‘ का गुरु मंत्र दिया। वे एक महान धर्म प्रवर्तक भी थे, जिन्होंने ज्ञान, कर्म और भक्ति का समन्व्य कर भागवत धर्म का प्रवर्तन किया। योगबल और सिद्धि से वे योगेश्वर (योग के ईश्वर) कहलाये। अर्थात योग के श्रेष्ठतम ज्ञाता, व्याख्याता, परिपालक और प्रेरक थे, जिनकी लोक कल्याणकारी लीलाओं से प्रभावित होकर वे आज न केवल भारत अपितु सम्पूर्ण विश्व में पूजे जाते हैं।
         भगवान श्रीकृष्ण के अवतार के सम्बन्ध में सूर्यकान्त बाली जी ने बहुत ही सुन्दर और सार्थक ढंग से लिखा है कि- “कृष्ण का भारतीय मानस पर प्रभाव अप्रतिम है, उनका प्रभामंडल विलक्षण है, उनकी स्वीकार्यता अद्भुत है, उनकी प्रेरणा प्रबल है, इसलिए साफ नजर आ रहे उनके निश्चित लक्ष्यविहीन कर्मों और निश्चित निष्कर्षविहीन विचारों में ऐसा क्या है, जिसने कृष्ण को कृष्ण बना दिया, विष्णु का पूर्णावतार मनवा दिया? कुछ तो है। वह ‘कुछ’ क्या है?  कृष्ण के जीवन की दो बातें हम अक्सर भुला देते हैं, जो उन्हें वास्तव में अवतारी सिध्द करती हैं। एक विशेषता है, उनके जीवन में कर्म की निरन्तरता। कृष्ण कभी निष्क्रिय नहीं रहे। वे हमेशा कुछ न कुछ करते रहे। उनकी निरन्तर कर्मशीलता के नमूने उनके जन्म और स्तनंध्य शैशव से ही मिलने शुरू हो जाते हैं। इसे प्रतीक मान लें (कभी-कभी कुछ प्रतीकों को स्वीकारने में कोई हर्ज नहीं होता) कि पैदा होते ही जब कृष्ण खुद कुछ करने में असमर्थ थे तो उन्होंने अपनी खातिर पिता वसुदेव को मथुरा से गोकुल तक की यात्र करवा डाली। दूध् पीना शुरू हुए तो पूतना के स्तनों को और उनके माधयम से उसके प्राणों को चूस डाला। घिसटना शुरू हुए तो छकड़ा पलट दिया और ऊखल को फंसाकर वृक्ष उखाड़ डाले। खेलना शुरू हुए तो बक, अघ और कालिय का दमन कर डाला। किशोर हुए तो गोपियों से दोस्ती कर ली। कंस को मार डाला। युवा होने पर देश में जहां भी महत्वपूर्ण घटा, वहां कृष्ण मौजूद नजर आए, कहीं भी चुप नहीं बैठे, वाणी और कर्म से सक्रिय और दो टूक भूमिका निभाई और जैसा ठीक समझा, घटनाचक्र को अपने हिसाब से मोड़ने की पुरजोर कोशिश की। कभी असफल हुए तो भी अगली सक्रियता से पीछे नहीं हटे। महाभारत संग्राम हुआ तो उस योध्दा के रथ की बागडोर संभाली, जो उस वक्त का सर्वश्रेष्ठ  धनुर्धारी था। विचारों का प्रतिपादन ठीक युध्द क्षेत्र में किया। यानी कृष्ण हमेशा सक्रिय रहे, प्रभावशाली रहे, छाए रहे।"
कृष्ण जन्मस्थली मथुरा का चित्र गूगल से साभार 

 सभी श्रद्धालु जनों को  भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें! 
कविता रावत के ब्लॉग KAVITARAWATBPLसे साभार! 

Monday, 21 July 2014

स्वर्गीय श्री सहाय ने सेवा धर्म का इतिहास बनाया - मुख्यमंत्री श्री चौहान

प्रथम शीतला सहाय स्मृति पुरस्कार से वरिष्ठ पत्रकार श्री मदनमोहन जोशी सम्मानित

भोपाल :  मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि स्वर्गीय शीतला सहाय ने सेवा-धर्म का इतिहास बनाया। श्री चौहान आज रविन्द्र भवन में शीतला सहाय पुण्य स्मृति समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम में केन्सर उपचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिये चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा स्थापित प्रथम शीतला सहाय स्मृति पुरस्कार वरिष्ठ पत्रकार श्री मदनमोहन जोशी को प्रदान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मुख्यमंत्री श्री सुंदरलाल पटवा ने की। कार्यक्रम में केन्द्रीय श्रम एवं खनन मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर और पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री सहाय उनके कार्यों के लिये समाज में सदैव जीवित रहेंगे। उनका जीवन देश और समाज के लिये था। अल्पायु पुत्र के मृत्युरूपी जीवन के सबसे बड़े दुख से वह टूटे नहीं और वज्र के समान संकल्प के साथ खड़े हो गये। श्री चौहान ने कहा कि श्री सहाय के कामों को आगे बढ़ाने के लिये सरकार और समाज को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि केंसर का एक बड़ा कारण तंबाकू है। केंसर को जड़ से उखाड़ फेकने के लिये तंबाकू के सेवन के खिलाफ जनजागृति अभियान चलाया जाना चाहिये।
केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि भावी पीढ़ी को सत्कर्म की प्रेरणा देने के लिये श्री शीतला सहाय के व्यक्तित्व का स्मरण किया जाना चाहिये। वे कर्मयोगी थे। कार्यकर्ताओं की प्रेरणा थे। समर्पण और संकल्प बल के धनी थे। उन्होंने ट्रक चलाकर कण्डे ढ़ोकर और लॉटरी बेचकर ग्वालियर में केंसर अस्पताल की स्थापना के लिये कार्य किया। यही कारण था कि आपातकाल के दौरान उनके जेल में रहते हुये भी केंसर अस्पताल के निर्माण का कार्य रुका नहीं। उनका सार्वजनिक जीवन स्वच्छ, निर्मल और पारदर्शी था।
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्री रामलाल ने कहा कि संवेदनशीलता और सेवाभाव ही व्यक्ति को बड़ा बनाता है। स्वर्गीय श्री शीतला सहाय ने राजनैतिक जीवन को नया आयाम दिया। उन्होंने बताया कि राजनीति केवल निर्वाचन तक सीमित नहीं है। राजनीतिज्ञ द्वारा भी विशाल सामाजिक संस्थायें खड़ी की जा सकती हैं। शीतला सहाय स्मृति ग्रंथ के संपादक श्री महेश श्रीवास्तव ने कहा कि स्वर्गीय श्री सहाय का कर्मक्षेत्र भले ही ग्वालियर रहा लेकिन उनकी कीर्ति पूरे प्रदेश और देश में व्याप्त है। कृतज्ञता ज्ञापन डॉ. श्रीमती अलका प्रधान ने किया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा स्वर्गीय शीतला सहाय स्मृति ग्रंथ का विमोचन और उनके जीवन पर निर्मित बेवसाइट का लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह, राजस्व एवं पुनर्वास मंत्री श्री रामपाल सिंह, सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री श्री लालसिंह आर्य, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री श्री शरद जैन, सांसद श्री अनूप मिश्रा और श्री भागीरथ प्रसाद, महापौर भोपाल श्रीमती कृष्णा गौर, ग्वालियर महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता पूर्व सांसद श्री विक्रम वर्मा, श्री कैलाश सारंग, श्री मेघराज जैन सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
अजय वर्मा

Friday, 18 July 2014

स्वस्थ जीवन शैली: कला और विज्ञान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी दिनांक 19-20 जुलाई, 2014 (शनिवार-रविवार)

आधुनिक सभ्यता ने भौतिक धरातल पर विचार और आचरण का जो ताना-बाना बुना है, जिसमें नैसर्गिता का लोप होता दिखाई पड़ता है। मानव निर्मित यह स्थिति क्रमिक रूप से मानव को प्राकृतिक विचारधारा और प्राकृतिक जीवन शैली से दूर ले जा रही है। प्रदूषित पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण दोहन, मानव की सोच, रहन-सहन, खान-पान आदि में आये परिवर्तनों के कारण मानव सामाजिक दुष्प्रभावों के साथ-साथ कई मनोदैहिक विकारों से त्रस्त हो रहा है।
मानव के स्वस्थ एवं सुखी जीवन के लिए मानव और प्रकृति के मध्य सह-अस्तित्व का जो संबंध है, उसे जानने तथा तद् अनुसार विवेकपूर्ण जीवनशैली विकसित करने की आवश्यकता पर प्रबुद्ध चिंतक, दक्ष चिकित्सक बल दे रहे हैं। इस आवश्यकता को अनुभव करते हुए, आरोगय भारती एवं मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिष् (मेपकास्ट) द्वारा “स्वस्थ जीवन शैली: कला और विज्ञान“ विषय पर दिनांक 19-20 जुलाई, 2014 (शनिवार-रविवार) को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है। यह संगोष्ठी मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (मेपकास्ट) स्थित सभागृह में 19 जुलाई को प्रातः 10 बजे उद्घाटन सत्र के साथ प्रारंभ होगी।
स्वस्थ रहने के लिए हर आयु वर्ग के अलग-अलग मानदंड होते हैं। गर्भावस्था से वृद्धावस्था तक स्वस्थ रहने के लिए होने वाले प्रयोग एवं उनसे संबंधित शोध पत्र इस दौरान प्रस्तुत किये जायेंगे। इस संगोष्ठी में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त गुजरात आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय जामनगर, भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान जयपुर एवं स्वामी विवेकानंद योग अनुसंसाधन संस्थान बेंगलूरु के वैज्ञानिकोें द्वारा शोधपत्रों का वाचन किया जायेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में अद्भत प्रयोग करने वाले व्यक्तियों के अनुभव कथन भी शामिल होंगे।
डाॅ. अशोक वार्ष्णेय , आ.भा. संगठन मंत्री, आरोग्य भारती

Thursday, 17 July 2014

भोपाल को दुनिया का सबसे सुन्दर शहर बनायेंगे

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भोपाल को दुनिया का सबसे सुन्दर शहर बनाया जायेगा। भोपाल में लाईट मेट्रो ट्रेन शुरू की जायेगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ करीब 29 करोड़ 47 लाख रूपये की लागत से बनने वाले केबल स्टे ब्रिज के शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में गृह मंत्री श्री बाबूलाल गौर, महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नगर निगम को विकास कार्यों के लिये मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना में 120 करोड़ रूपये उपलब्ध करवाये गये हैं। भोपाल में राजधानी होने के गौरव को बढ़ाने वाले विकास कार्य किये गये हैं। भोपाल में सुनियोजित विकास हुआ है। यातायात की दिक्कतों को दूर किया गया है। भोपाल के विकास के लिये राज्य सरकार हरसंभव मदद करेगी। इस केबल स्टे ब्रिज के बनने से भोपाल की गौरव बड़ी झील की सुन्दरता और बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज मध्यप्रदेश विकास के हर मापदण्ड पर आगे बढ़ रहा है। विकास दर और कृषि विकास में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विकास का लाभ हर गरीब तक पहुँचाया गया है क्योंकि हम मानते हैं कि संसाधनों पर सबका हक है। ऐसी आवास नीति बनाई जा रही है जिसमें सबके लिये आवास की व्यवस्था हो। उन्होंने अपील की कि हर बच्चे को स्कूल भेजें और शिक्षित मध्यप्रदेश बनाने में हर नागरिक सहयोग करे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भोपाल नगर निगम बेहतर काम कर रही है। नगर निगम को राज्य शासन का पूरा सहयोग मिलेगा। ग्रामीण विकास मंत्री एवं जिले के प्रभारी श्री गोपाल भार्गव ने कहा कि मध्यप्रदेश शहरी और ग्रामीण विकास दोनों क्षेत्रों में अग्रणी है। इस केबल ब्रिज के बनने से यातायात सुगम होगा।
महापौर श्रीमती कृष्णा गौर ने स्वागत भाषण में कहा कि कमला पार्क से रेत घाट तक बनने वाला यह केबल स्टे ब्रिज शहर के लिये एक बड़ी सौगात है। प्रदेश का पहला 6 लेन फ्लाय ओवर हबीबगंज में बन रहा है। विधायकगण सर्वश्री आरिफ अकील, सुरेन्द्र नाथ सिंह, विश्वास सारंग, रामेश्वर शर्मा और विष्णु खत्री, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष श्री मोहम्मद सगीर, महापौर परिषद के सदस्य, पार्षद और प्रशासनिक अधिकारी इस मौके पर उपस्थित थे। अंत में आभार प्रदर्शन नगर निगम अध्यक्ष श्री कैलाश मिश्रा ने किया।
केबल स्टे ब्रिज
भोपाल शहर में कमला पार्क से रेत घाट तक केबल स्टे ब्रिज का निर्माण कार्य जेएनएनयूआरएम में 29.47 करोड़ रुपये लागत से करवाया जायेगा। ब्रिज 300 मीटर लम्बाई में एवं 17 मीटर चौड़ाई में बनाया जायेगा। अत्याधुनिक तकनीक से बनाये जाने वाला यह स्टील केबल स्टे ब्रिज पुराने और नये भोपाल शहर के बीच सेतु का काम करेगा।               एस.जे.

Tuesday, 15 July 2014

धुएं में फिक्र

कभी बचपन में हम बच्चों को दुबले-पतले, खांस-खांस कर बीड़ी फूंकते हुए बुजुर्गो के मुंह से बीड़ी खींच कर और फिर उन्हें यह कह कर चिढ़ाते हुए खूब मजा आता था कि ‘बीडी पीकर ज्ञान घटे, खांसत-खांसत जी थके, खून सूखा अंदर का, मुंह देखो बन्दर का’ । हमारी इन हरकतों से नाराज होकर जब कोई बुजुर्ग हमारे पीछे अपनी बीड़ी के लिए हांफ-हांफ कर दौड़ लगा बैठते तो हम एक ही सांस में दूर तक भाग खड़े होते। तब हताश होकर वे बेचारे थोड़ी दूर भागने के बाद ही थक हारकर वहीं बैठ बंडल से दूसरी बीड़ी जलाकर धुंआ उगलने बैठ जाते। यह देख हम चोरी-छिपे दबे पांव आकर उनके पीछे चुपचाप इस ताक में बैठ जाते कि कब हमें फिर से यह खेल खेलने का मौका मिले। इस दौरान जब कभी उनकी नजर हम पर पड़ती तो वे डांटने डपटने के बजाय मुस्कराते हुए उल्टी-सीधी बीड़ी मुंह में फंसा कर कभी नाक से तो कभी मुंह से हवा में धुंए की विभिन्न कलाकृतियाँ उकेरने लगते तो हम मंत्रमुग्ध होकर यह खेल देखते दंग रह जाते। तब उनका यह करतब हमारे लिए किसी जादूगर के जादू से कम न था।

बचपन के दिन बीते और बड़े हुए। समझ में आया कि बचपन में हम तो मासूम थे ही, लेकिन बीड़ी का धुंआ उड़ाने वाले हमारे बड़े बुजुर्ग भी कम मासूम न थे, जो खांसते-खांसते बेदम होकर भी हमें धुंए की जादूगरी दिखाना कभी न भूले, पर कभी यह न जान सके कि यह धुंआ सबके लिए कितना घातक है। आज भी गांव से लेकर शहर तक जब किसी को बेफ्रिक होकर धुंआ उड़ाते, मुंह में गुटखा ठूसें देखती हूँ तो यही लगता कि हम पहले से भी ज्यादा मासूम हो चुके हैं, जो लाख चेतावनी और जागरूकता के बावजूद भी तम्बाकू को गले लगाकर खुश हुए जा रहे हैं।
           हाल ही में तम्बाकू से बचने के तमाम उपदेशों के प्रचार के साथ विश्व तम्बाकू निषेध दिवस गुजर गया। माना जाता है कि धूम्रपान सर्वप्रथम अमेरिका में 'रेड इंडियंस' ने शुरू किया। सन् 1600 के प्रारम्भ में यह यूरोप के देशों में फैला।   मौजूदा समय में विश्व जनसंख्या का एक बड़ा भाग धूम्रपान  के रूप में तम्बाकू का उपयोग करता है, बहुत सारे लोग इसे चबाते हैं।  जबकि  लगभग सभी वैज्ञानिक शोध तम्बाकू के नतीजों में तम्बाकू के सेवन को हानिकारक बताया गया है। निकोटीन सिगरेट में प्रयोग होने वाली तम्बाकू का एक व्यापक उत्तेेजना पैदा करने वाला घातक होता है। यह अधिक विषैला होता है और शरीर पर कई तरह के घातक असर डालता है।  धूम्रपान से बढ़ा हुआ रक्त हृदय रोग की संभावनाओं को बढ़ा देता है। गर्भवती महिलाओं में निकोटिन से भ्रूण की वृद्धि कम होती है। निकोटीन के अलावा तम्बाकू के धुंए में कार्बनमोनोआॅक्साइड बहुचक्रीय ऐरोमेटिक हाइड्रोकार्बन एवं टार पाये जाते हैं।  यह टार कैंसर पैदा करने में किस तरह की भूमिका निभाता है, यह अब छिपा नहीं है। यह ध्यान रखना चाहिए कि  फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित पंचानबे फीसद मरीज धूम्रपान या तम्बाकू चबाने के कारण इस स्थिति में पहुंचते हैं। इसके अलावा, भारत में सबसे ज्यादा टीबी या तपेदिक के रोगी मिलते हैं, जिसकी एक सबसे बड़ी वजह धूम्रपान ही है। साथ ही, खांसी या  ब्रोंकाइटिस,  हृदय संवहनी रोग, फेफड़ों की बीमारी का नतीजा यह होता है की इससे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो जाता है।
दरअसल, तम्बाकू सेवन रोगों को खुला निमंत्रण तो देता ही है, साथ ही यह धूम्रपान न करने वालों को चिड़चिड़ा बनाता है। बल्कि सच कहा जाय तो धूम्रपान न करने वाले इसकी आदत रखने वालों से परेशान ही रहते हैं, भले ही वे सार्थक विरोध नहीं जता पाएं।